विनायक दामोदर सावरकर के बारे मे जानकारी 2023

विनायक दामोदर सावरकर के बारे मे जानकारी 2023



विनायक दामोदर सावरकर, जिन्हें विशेषतः "वी. डी. सावरकर" या "वी. डी. सरकर" के नाम से भी जाना जाता है, एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, संगठक, विचारक, और लेखक थे। वे 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के भागतवड़ी जिले के भीमा बॉली गांव में पैदा हुए थे। वी. डी. सावरकर को हिंदू राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रमुख प्रवक्ता में से एक माना जाता है और उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी अपना योगदान दिया।


वी. डी. सावरकर का जीवन परिचय और कार्य:

वी. डी. सावरकर का जन्म महाराष्ट्र के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम दामोदर पंत सावरकर था और मां का नाम राधाबाई था। सावरकर का शैक्षिक करियर भी काफी उत्कृष्ट था। उन्होंने बॉम्बे विद्यापीठ (Bombay University) से अंग्रेजी और संस्कृत साहित्य में मास्टर डिग्री हासिल की।

वी. डी. सावरकर ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने 1909 में अंग्रेजी सरकार के खिलाफ क्रांति के आरोप में गिरफ्तार होने का सामना किया था और वे लंदन में कारावासी रहे थे। उन्होंने द्वारा लिखी गई एक पत्रिका नामकरण "कलपना" के माध्यम से भारतीय राष्ट्रवाद की प्रचार-प्रसार किया था।

सावरकर ने भारतीय स्वतंत्रता के लिए दिए गए युद्ध में भी अपना योगदान दिया और १९१० में अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध आंदोलन के कारण उन्होंने पूर्वांचल में नारी सत्याग्रह की शुरुआत की थी। उन्होंने विदेशी वसूली और विदेशी साम्राज्यवाद के खिलाफ भारतीय समाज को जागरूक करने का प्रयास किया था।


भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन और समर्थन:

वी. डी. सावरकर ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न पहलुओं को समर्थन दिया और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपना सक्रिय योगदान दिया। उनकी सोच और दृष्टिकोण राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन को एक मानसिकता के साथ संबोधित करते थे। वे हिंदुत्व के प्रवक्ता थे और उन्होंने भारतीय राष्ट्रीयता के लिए एक एकता भाव का प्रचार-प्रसार किया।

उनके समर्थन में भारतीय समाज के कई वर्ग शामिल थे, जिनमें से कुछ उनके विचारधारा के साथ सहमत नहीं थे, लेकिन उनके प्रयासों को उन्होंने समर्थन दिया। उनके समर्थन में कुछ व्यक्तिगत और सामाजिक संर्घणनों ने भी अपना योगदान दिया। वे भारतीय स्वतंत्रता सेनानी वसंत गडगील, बाल गंगाधर तिलक, और लाला लाजपत राय के साथ भी संबंध रखते थे।


निष्कण्टक पक्ष के संस्थापक:

वी. डी. सावरकर ने 1905 में "अभिनव भारत भारती" नामक संस्था की स्थापना की, जिसे निष्कण्टक पक्ष (Non-Cooperation Party) के रूप में जाना जाता है। इस संस्था का उद्देश्य अंग्रेजी शिक्षण के विरुद्ध आंदोलन करना था और वे इस संस्था के माध्यम से भारतीय विद्यार्थियों को राष्ट्रीय भावना के साथ प्रेरित करते थे।


महानायक आरएसएस के संगठक:

वी. डी. सावरकर को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान देने के लिए जाना जाता है, लेकिन उन्होंने भारतीय समाज के लिए अपने संगठनात्मक कौशल के लिए भी चर्चित थे। उन्होंने "राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ" (RSS) नामक संगठन की स्थापना की, जिसे भारतीय संस्कृति और दर्शन के रक्षक के रूप में जाना जाता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भारतीय संस्कृति, शिक्षा, और सेवा के लिए स्वयंसेवा भाव के साथ संगठित होता है।


विचारधारा और विवाद:

वी. डी. सावरकर के विचारधारा पर अलग-अलग मतान्तर रहे हैं। वे भारतीय राष्ट्रीयता, हिंदुत्व, और स्वाधीनता के प्रचार-प्रसार के पक्ष में थे। उन्होंने विदेशी शासन के खिलाफ विरोध दिया और भारतीय संस्कृति और धरोहर को प्रमुखता दी।

हालांकि, वी. डी. सावरकर के विचारधारा को भी विवादित माना जाता है। उन्हें संबंधित कुछ मामूली और विवादित विचारधारा का समर्थक बताते हैं। उनके कुछ विचारों को भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय स्वतंत्रता के पक्ष में विशेषतः देखा जाता है, जबकि उनके कुछ विचार धर्म, समाज, और राजनीति से सम्बंधित हैं, जिन्हें विवादित माना जाता है।

सावरकर के विचारधारा को लेकर विवाद का एक मुख्य बिंदु यह है कि कुछ लोग उन्हें भारतीय राष्ट्रवाद के प्रमुख प्रवक्ता के रूप में मानते हैं, जबकि कुछ उन्हें हिंदुत्व के प्रवक्ता और संस्थापक के रूप में जानते हैं। उनके कुछ विचारों को भारतीय समाज के लिए अवगतः और उचित मानते हैं, जबकि कुछ उन्हें विवादित और अयोग्य समझते हैं।

वी. डी. सावरकर के संघर्ष और समर्थन ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नया रुप दिया और उन्हें एक महान स्वतंत्रता सेनानी के रूप में याद किया जाता है। उनका योगदान भारतीय समाज और राष्ट्रीयता के विकास में अवदानी रहा है। उनकी विचारधारा और विचारशीलता के विषय में भारतीय लोगों में विभिन्न मतान्तर रहे हैं, लेकिन उन्हें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण व्यक्ति माना जाता है।


F/Q 

सावरकर को काला पानी की सजा क्यों मिली?

सावरकर को काला पानी की सजा उनके संघर्षपूर्वक कार्यों के लिए मिली थी। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान देने के लिए देशभक्ति और राष्ट्रीयता के प्रचार-प्रसार में भूमिका निभाई थी। उनकी विचारधारा और कार्यकलापों के कुछ विचारों को विवादित माना गया, जिसके कारण उन्हें अंग्रेजी सरकार द्वारा काला पानी की सजा का सामना करना पड़ा।


विनायक दामोदर सावरकर का स्वतंत्रता संघर्ष में क्या योगदान है?

विनायक दामोदर सावरकर का स्वतंत्रता संघर्ष में उनका महत्वपूर्ण योगदान था। उन्होंने 1905 में भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के आरंभ के लिए "अभिनव भारत भारती" नामक संस्था की स्थापना की, जिसके द्वारा वे राष्ट्रीयता के सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार करते थे। उन्होंने राष्ट्रीय संस्कृति, भाषा, और धरोहर के प्रमुख पक्ष में भारतीय लोगों को जागरूक किया। उनके प्रयासों के फलस्वरूप उनके समर्थन में भारतीय समाज के कई वर्ग शामिल हुए, जिनमें से कुछ उनके विचारधारा के साथ सहमत नहीं थे, लेकिन उनके संघर्ष को समर्थन दिया।


विनायक दामोदर सावरकर इतिहास में क्यों प्रसिद्ध है?

विनायक दामोदर सावरकर इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में प्रसिद्ध हैं। उनकी विचारधारा, विचारों की गहराई और उनके संघर्षपूर्वक कार्यों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नया रुप दिया। उनकी सोच और दृष्टिकोण ने लोगों को भारतीय संस्कृति, भाषा, और धरोहर के प्रति जागरूक किया। उनका योगदान भारतीय समाज और राष्ट्रीयता के विकास में महत्वपूर्ण रहा है, जिसके कारण उन्हें एक राष्ट्रीय वीर और स्वतंत्रता सेनानी के रूप में याद किया जाता है। उनकी संघर्ष पूर्वक कार्यशैली और देशभक्ति ने उन्हें भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान दिया है।


एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने

संपर्क फ़ॉर्म