स्वामी विवेकानंद जी के बारे मे सम्पूर्ण जानकारी 2023 Hindi biography

स्वामी विवेकानंद जी के बारे मे सम्पूर्ण जानकारी



स्वामी विवेकानंद भारतीय संत, धार्मिक नेता, दार्शनिक, स्वतंत्रता सेनानी और विश्वस्तरीय विचारक थे। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल (भारत) में हुआ था और मृत्यु 4 जुलाई 1902 को बेलूर मठ, कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुई। स्वामी विवेकानंद का असली नाम नरेंद्र नाथ दत्त था और उन्हें नरेंद्र के नाम से पुकारा जाता था। वे विवेकानंद (Vivekananda) नाम से भारतीय संत रामकृष्ण परमहंस के गुरुभाई एवं शिष्य बंदु थे। स्वामी विवेकानंद ने विश्व भर में धर्म, संस्कृति और ज्ञान के प्रचार-प्रसार के लिए अद्भुत प्रयास किए और उनके विचारधारा ने लाखों लोगों को प्रेरित किया।

स्वामी विवेकानंद के जीवन के बारे में बताने के लिए हम उनके जीवन के कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं और उनके विचारधारा के बारे में चर्चा करेंगे:


1. बचपन और शिक्षा:

नरेंद्र नाथ दत्त का जन्म कोलकाता के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता विष्णु प्रिया दत्त एक धार्मिक वकील थे और माता भुवनेश्वरी देवी एक प्रशासक धर्मिक महिला थी। नरेंद्र को बचपन से ही धार्मिक भावना थी और उन्होंने बचपन से ही ध्यानाभ्यास और धार्मिक अध्ययन में रुचि दिखाई। उनके पिता की मृत्यु के बाद, उन्हें परिवार का पालन करने की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी।

नरेंद्र की शिक्षा में भी विशेष रूप से धार्मिक अध्ययन को महत्व दिया गया था। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा विधालय स्तर पर पूरी की और फिर प्रेसिडेंसी कॉलेज (Presidency College) में शिक्षा लेना शुरू किया। वहां उन्हें वेबस्टर, मिल्टन, शैक्सपियर और केवडिन संबंधित विषयों में शिक्षा मिली। उनके विचारधारा के निर्माण में उनके अध्यापक विशेष रूप से प्रभावशाली थे।


2. रामकृष्ण परमहंस के शिष्य बनना:

1879 में, नरेंद्र ने अपनी मित्र राखाल द्वारा रामकृष्ण परमहंस के दर्शन के लिए प्रेरित होकर उनसे मिलने का निर्णय किया। स्वामी रामकृष्ण ने नरेंद्र को उनके उद्दीपनात्मक विचारों से प्रभावित किया और उन्हें धार्मिक अनुभवों का अनुभव हुआ। वे उन्हें भक्ति, ध्यान, और आध्यात्मिकता में मार्गदर्शन करते रहे। इस समय पर ही नरेंद्र का नाम 'विवेकानंद' पड़ने लगा।


3. विवेकानंद के बारे में राष्ट्रीय विचार:

स्वामी विवेकानंद ने विविध राष्ट्रीय मुद्दों पर अपने विचार प्रस्तुत किए और उन्होंने भारतीय राष्ट्रवाद के प्रचार-प्रसार में अपना सक्रिय योगदान दिया। उन्होंने भारतीय समाज को सकारात्मक रूप से जागरूक करने के लिए धार्मिकता, राष्ट्रीयता, सामाजिक समानता और वैज्ञानिक विकास के मुद्दे पर जोर दिया। उनके विचार धारा का मुख्य लक्ष्य था भारतीय जनता को जागृत करने और उन्हें सम्पूर्ण स्वाधीनता के लिए प्रेरित करने का।


4. श्रम, सेवा, और संस्कृति को प्रोत्साहन:

स्वामी विवेकानंद ने श्रम, सेवा, और संस्कृति को प्रोत्साहन दिया। उन्होंने कहा था, "उठो, जागो, और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाए।" उन्होंने भारतीय युवा पीढ़ी को एक सकारात्मक सोच और भारतीय संस्कृति के प्रति गर्व और सम्मान के साथ जीने का संदेश दिया। उन्होंने समाज में सेवा भाव को जागृत किया और भारतीय संस्कृति को प्रोत्साहन दिया जिससे लाखों लोग प्रेरित हुए और समृद्धि और उन्नति के मार्ग में अग्रसर हुए।


5. विश्व भर में भारतीय धरोहर का प्रचार-प्रसार:

स्वामी विवेकानंद ने विश्व भर में भारतीय धरोहर, संस्कृति, और दर्शन का प्रचार-प्रसार किया। उनके द्वारा संचालित 'भारतीय धर्म सभा' नामक संस्था ने विभिन्न धर्म, धरोहर, और संस्कृतियों का प्रचार-प्रसार किया। उन्होंने विश्वभर के लोगों को भारतीय संस्कृति की महानता के प्रति जागरूक किया। उन्होंने संस्कृति, धरोहर, धार्मिक तत्व, और वेदांत के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं का प्रचार-प्रसार किया।


6. विश्व संघर्ष का प्रतिनिधित्व:

स्वामी विवेकानंद ने विश्व भर में भारतीय धरोहर, संस्कृति, और दर्शन का प्रचार-प्रसार किया। उन्होंने विश्वभर के लोगों को भारतीय संस्कृति की महानता के प्रति जागरूक किया। उन्होंने संस्कृति, धरोहर, धार्मिक तत्व, और वेदांत के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं का प्रचार-प्रसार किया।


6. विश्व संघर्ष का प्रतिनिधित्व:

स्वामी विवेकानंद को विश्व संघर्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले विचारकों में से एक माना जाता है। उन्होंने धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर विचार किए, समाज में सुधार के लिए आवाज बुलंद की और विभिन्न राष्ट्रों में भारतीय धरोहर के प्रति जागरूकता फैलाई। उन्होंने विविध देशों में भारतीय धरोहर, संस्कृति और दर्शन का प्रचार-प्रसार किया और भारतीय विचार और दर्शन की प्रसिद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान दिया।


7. विश्व धरोहर विवर्धन:

स्वामी विवेकानंद ने विश्व भर में भारतीय धरोहर, संस्कृति और दर्शन के प्रचार-प्रसार के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने विविध देशों में भारतीय धरोहर, संस्कृति और दर्शन का प्रचार-प्रसार किया और भारतीय विचार और दर्शन की प्रसिद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान दिया।


8. संघर्ष में तपस्या और निरंतरता:

स्वामी विवेकानंद के जीवन में संघर्ष के कई क्षण आए। उन्होंने विविध परिस्थितियों में अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए तपस्या और निरंतरता से काम किया। उन्हें विभिन्न बाधाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी भी अपने लक्ष्य से हाथ नहीं मोड़ा और निरंतर प्रयास किया। उन्होंने अपने संघर्षों को अवसर में बदलने की कला को सीखा और अपने विश्वास के साथ संघर्ष किया।


9. समाज में समर्थन:

स्वामी विवेकानंद को विश्व संघर्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले विचारकों में से एक माना जाता है। उन्होंने धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर विचार किए, समाज में सुधार के लिए आवाज बुलंद की और विभिन्न राष्ट्रों में भारतीय धरोहर के प्रति जागरूकता फैलाई। उन्होंने विविध देशों में भारतीय धरोहर, संस्कृति और दर्शन का प्रचार-प्रसार किया और भारतीय विचार और दर्शन की प्रसिद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान दिया।


10. निरंतर सेवा भाव:

स्वामी विवेकानंद के जीवन में सेवा भाव की एक महत्वपूर्ण गुणवत्ता थी। उन्होंने समाज के असहाय और गरीब लोगों की मदद करने के लिए संघर्ष किया। उन्होंने शिक्षा, चिकित्सा, और खाद्य संसाधन के क्षेत्र में निरंतर सेवा प्रदान की। उन्होंने विभिन्न दानवीरों के साथ मिलकर सेवा की और समाज में बदलाव के लिए सक्रिय रूप से काम किया।

स्वामी विवेकानंद के जीवन और कार्य में इतनी विविधता और समृद्धि है कि एक छोटे से post  में उनके सभी पहलुओं की चर्चा करना संभव नहीं है। उनके विचार, संघर्ष, सेवा और देशभक्ति की अनमोल शिक्षाएं हमें आज भी प्रेरित करती हैं। उनका सन्देश समय से पहले ही विश्वभर के लोगों तक पहुंचा था और उसका महत्व आज भी बरकरार है। उनके जीवन के अलौकिक यात्रा के बारे में और अधिक जानने के लिए हमें उनकी लेखनी की अद्भुत ग्रंथों को अध्ययन करना चाहिए जो हमें अध्यात्म, समाज, और संस्कृति के प्रति जागरूक बनाते हैं।

स्वामी विवेकानंद के जीवन का संक्षेपण में उपसंग्रहण करना बड़ी चुनौती है, लेकिन उनके विचारों के सार में उनकी एक मुख्य संदेश था - "उठो, जागो, और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाए।" उन्होंने अपने जीवन को एक उद्दीपनात्मक उद्दीपना के रूप में देशवासियों के लिए समर्पित किया और उनके संदेश आज भी हमें प्रेरित करते हैं। उन्होंने संघर्ष के दौरान कई कठिनाइयों का सामना किया और अपने जीवन के उद्दीपक दियोदी के रूप में अपने समय को आत्मार्थ और समाज के लिए उपयोगी बनाने में सक्रिय रूप से काम किया। उनका संघर्ष, सेवा भाव, और निरंतरता हम सभी को प्रेरित करता है और उनका योगदान हमारे देश और समाज के विकास में अविस्मरणीय है।


F/Q

1.स्वामी विवेकानंद का मूल मंत्र क्या है?

स्वामी विवेकानंद का मूल मंत्र उनके विचारों और दर्शन का सार है - "उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।" यह मंत्र उनके जीवन और कार्यक्षेत्र में उनकी प्रेरणा और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है।


2.स्वामी विवेकानंद कितने तक पढ़े थे?

स्वामी विवेकानंद ने प्राथमिक शिक्षा में छह वर्ष काला कार्यक्रम पूरा किया था और उन्होंने द्वादश वर्षीय आयु में ही शास्त्रीय शिक्षा शुरू कर दी थी। बाद में उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से विज्ञान की उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। इसके बाद, उन्होंने संस्कृत विश्वविद्यालय में दार्शनिक अध्ययन किया था।


3.विवेकानंद के बारे में आप क्या जानते हैं?

स्वामी विवेकानंद एक प्रख्यात भारतीय धार्मिक नेता, योगी, दार्शनिक, और विचारक थे। वे वेदांत के विश्वविख्यात प्रचारक थे और राष्ट्रीय एकता, विश्व मित्रता, और मानवता के प्रचार-प्रसार के लिए प्रसिद्ध थे। स्वामी विवेकानंद का असली नाम नरेंद्रनाथ दत्त था और वे 12 जनवरी 1863 को कोलकाता, भारत में पैदा हुए थे।


4.स्वामी विवेकानंद रात में कितने घंटे सोते थे?

स्वामी विवेकानंद रात में लगभग चार घंटे तक सोते थे। उनके जीवन में तपस्या, ध्यान, और सेवा का अधीन रहने की परंपरा थी और वे रात्रि में अधिकांश समय जागते रहते थे। उनका दिनचर्या बहुत अनुशासित और आदर्शवादी था जो सामाजिक और आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर अपने शिष्यों को प्रेरित करता था।

 

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