Raksha bandhan 2023 मे कब है | रक्षा बंधन के संबंधित कहानी

Raksha bandhan 2023 


Raksha bandhan 2023

रक्षाबंधन 2023 में 30 और 31 अगस्त दोनों दिन ही हैं। आप इन दिनों में किसी भी दिन रक्षाबंधन मना सकते हैं, जो आपके परिवार की आवश्यकताओं और उपयोग के अनुसार उपयुक्त हो।


राखी की सोना और चांदी से बनी राखियों के लाभ:(Benefits of gold and silver rakhi)

मान्यता के अनुसार, सोने और चांदी की राखियाँ भाई-बहन के बंध को धार्मिक और स्वर्णिम बनाने का संकेत मानी जाती हैं।

ये राखियाँ धार्मिकता और प्रतिष्ठा को बढ़ावा देती हैं।

सोने और चांदी की राखियाँ भाई-बहन के बंध को स्थायी बनाने और बरकरार रखने के लिए मान्यता प्राप्त करती हैं।

इन राखियों का धारण करने से स्वास्थ्य, धन, और सुख-शांति की वर्षा होती है।


राशियों के अनुसार राखियाँ:(Rakhi according to zodiac signs)

मेष राशि (Aries): लाल रंग की राखी

वृषभ राशि (Taurus): सोने की राखी

मिथुन राशि (Gemini): स्वर्ण या मोती की राखी

कर्क राशि (Cancer): पीले रंग की राखी

सिंह राशि (Leo): चांदी या स्वर्ण रंग की राखी

कन्या राशि (Virgo): हरा रंग की राखी

तुला राशि (Libra): स्वर्ण या चांदी की राखी

वृश्चिक राशि (Scorpio): लाल रंग की राखी

धनु राशि (Sagittarius): स्वर्ण या केंद्रीय वितरित रंग की राखी

मकर राशि (Capricorn): भूरे रंग की राखी

कुंभ राशि (Aquarius): स्वर्ण या सफेद रंग की राखी

मीन राशि (Pisces): स्वर्ण या हरा रंग की राखी


Raksha bandhan  कोन कोन मानते है:(raksh bandhan kon kon manate hai)

हिन्दू ,सीख,जैन,ओर भूद्ध धर्म के लोग मानते है |


Raksha bandhan 2023 का शुभ मुहूर्त कब है :(shubh date)

रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त 12 अगस्त 2023 को सुबह 06:24 से 19:07 तक रहेगा।


Raksha bandhanपूजन विधि:(pooja ka vidhi)

Raksha bandhan के दिन, एक पूजा स्थल तैयार करें।

Raksha bandhan की राखी को पूजन स्थल पर रखें।

पूजा स्थल पर दीपक जलाएं और उसे सजाएं।

Raksha bandhan मंत्र जप करें और अपने भाई की कलाई पर राखी बांधें।

भाई को वरमाला और उपहार दें।

प्रार्थना करें और अपने भाई के लिए शुभकामनाएं दें।


Raksha bandhan2023 के लिए मंत्र:

"येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।

तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥"


भद्रा मास में राखी क्यों नहीं बांधी जाती है:

भद्रा मास में राखी नहीं बांधी जाती है क्योंकि भद्रा मास धार्मिक और साम्प्रदायिक कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है। इस मास में संस्कृतिक और धार्मिक कार्यों को छोड़कर व्यापारिक और आर्थिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।


Raksha bandhanपर भद्रा का साया:

Raksha bandhan के दिन भद्रा मास का साया नहीं आता है। भद्रा मास धार्मिक कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है और इसलिए राखी बांधने के दिन इसका प्रभाव नहीं पड़ता है।


किस तरह की राखी का इस्तेमाल करना चाहिए: (what kind of rakhi should be used)

राखी का चयन करते समय, आप अपनी पसंद के अनुसार विभिन्न प्रकार की राखियों का इस्तेमाल कर सकते हैं। परंतु कुछ लोग इन विशेष राखियों का प्राथमिकता देते हैं:

त्रिमूर्ति राखी: जिसमें तीनों देवताओं की मूर्तियाँ होती हैं - ब्रह्मा, विष्णु, और महेश।

स्वस्तिक राखी: जिसमें स्वस्तिक चिन्ह होता है, जो शुभता और सौभाग्य का प्रतीक होता है।

मोती राखी: जिसमें मोती का उपयोग होता है, जो सौभाग्य और समृद्धि की प्रतीक होता है।

धागा राखी: जिसमें सादा रंग का धागा होता है, जो आपसी बंधन को प्रतिष्ठित करता है।

कर्मकांड राखी: जिसमें विशेष पूजा सामग्री और मंत्र के अंश होते हैं, जो धार्मिक महत्वपूर्णता देते हैं।

आप अपनी प्राथमिकता और आपके परिवार की संस्कृति और धार्मिक अनुसार रक्षाबंधन की राखी चुन सकते हैं।


रक्षा बंधन किस धर्म मे मनाया जाता है:

रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) हिन्दू धर्म में मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्योहार है, जो भारत और दक्षिण एशिया के कुछ अन्य हिस्सों में मनाया जाता है। यह दिन भाई-बहन के बंधन को समर्पित होता है। "Raksha bandhan" शब्द का अर्थ होता है "सुरक्षा का बंधन" या "संरक्षण का बंधन"।

यह त्योहार आमतौर पर हिन्दू मास श्रावण के पूर्णिमा दिवस पर मनाया जाता है, जो आमतौर पर अगस्त में पड़ता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाईयों में एक सजावटी धागा जिसे "राखी" कहा जाता है, बांधती हैं। यह धागा प्यार, सुरक्षा और भलाई के प्रतीक के रूप में स्वीकार किया जाता है। विनम्रता के साथ, भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं और उन्हें संरक्षण और सहयोग का वादा करते हैं।


Raksha bandhanके संबंधित कहानी:

Raksha bandhan का उद्गम विभिन्न ऐतिहासिक और पौराणिक घटनाओं से जुड़ा हुआ है। इस त्योहार के साथ जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा है मेवाड़ की रानी कर्णावती और मुग़ल सम्राट हुमायूँ की कथा। 16वीं शताब्दी में, जब मेवाड़ आक्रमण का सामना कर रहा था, रानी कर्णावती ने मुग़ल सम्राट हुमायूँ को एक राखी भेजी और उनकी सहायता और संरक्षण की मांग की। उनके व्यवहार से प्रभावित हुए, हुमायूँ ने तत्परता से उनकी सहायता की। यह कहानी कथात्मक है, जो रक्षा बंधन का महत्व एक संरक्षण के बंध के रूप में दर्शाती है।


Raksha bandhan कोन मानते है:

Raksha bandhan केवल जीवित भाई-बहन के बीच सीमित नहीं होता है। इसे चचेरे भाई-बहन, करीबी दोस्तों और यहां तक कि ऐसे रिश्तों के बीच भी मनाया जाता है जो भाई-बहन के रूप में मान्यता प्राप्त करते हैं। यह त्योहार व्यक्तियों के बीच मजबूत बंधन की प्रतीति कराता है और परिवार के रिश्तों के महत्व को बल देता है।

रक्षा बंधन के दिन परिवार सभी साथ आते हैं, उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं और विभिन्न धार्मिक आचारों को पालते हैं। बहनें अक्सर एक विशेष थाली तैयार करती हैं, जिसमें राखी, दीया, मिठाई और चावल शामिल होते हैं। वे अपने भाइयों की कलाईयों पर राखी बांधती हैं, उनके माथे पर तिलक लगाती हैं और आरती करती हैं। भाई, उपहार या धन देते हैं और अपनी बहनों की संरक्षा और सहयोग का वादा करते हैं।

Raksha bandhanएक आनंदमय पर्व है जो भाई-बहन के बंध को मजबूत करता है और परिवारी बंधन के महत्व को सुनिश्चित करता है। यह प्यार, विश्वास और जीवन भरे संबंध के जीवंत आदर्श का जश्न है। इस त्योहार का सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व भी होता है, जो विभिन्न समुदायों के बीच में समानता और एकता को बढ़ावा देता है।


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