दिवाली कब है 2023 मे जानिए इस post मे

दिवाली कब है 2023

इस साल देशभर में दिवाली 12 नोवेम्बर 2023 , रविवार को मनाई जाएगी। लक्ष्मी पूजा मुहूर्त- शाम 06:11 बजे से रात 08:15 बजे तक रहेगा। अमावस्या तिथि 12 नवंबर को दोपहर 02 बजकर 44 मिनट से प्रारंभ होगी और 13 नवंबर 2023 को दोपहर 02 बजकर 56 मिनट पर समाप्त होगी।

दीवाली एक प्रमुख हिंदू त्योहार है जो भारतीय सभ्यता में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह प्रतिवर्ष अक्टूबर और नवंबर के महीनों के बीच मनाया जाता है। दीपावली को "लक्ष्मी पूजा" या "दीपावली पूजा" के नाम से भी जाना जाता है, जिसमें भगवान लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इसे रंगों, दीपों और आतिशबाज़ी के शानदार प्रदर्शन के साथ मनाया जाता है। दीपावली मनुष्यों को खुशियों, समृद्धि, सुख और सफलता की कामना करता है।



इतिहास:

 दिवाली के इतिहास में कई कथाएं हैं, जिनमें से सबसे प्रसिद्ध कथा है भगवान राम के अयोध्या लौटने की कथा। अयोध्या में नगर वासियों ने भगवान राम के स्वागत में दीपावली के दीप जलाए। इसके अलावा,  दिवालीमहाभारत के अनुसार पांडवों के वनवास के अंत की सूचना देती है, जब वे अपने अज्ञातवास में 13 वर्षों के बाद अपने गृहवास लौटे।


महत्त्व:

आध्यात्मिक महत्त्व: दिवाली पर लोग भगवान लक्ष्मी की पूजा करते हैं और उनसे धन, समृद्धि, और सफलता की प्रार्थना करते हैं। यह आध्यात्मिक उन्नति, धार्मिकता, और आत्मज्ञान की महत्वपूर्ण अवसर है।

आर्थिक महत्त्व:  दिवाली का अर्थ होता है "दीपों की पंक्ति"। इस अवसर पर लोग अपने घरों को सजाते हैं, खुशियों के साथ गिफ्ट्स और धन व्यय करते हैं। यह व्यापारिक और आर्थिक महत्त्व रखता है।


अन्य धर्मों में:

जैन:  दिवाली जैन धर्म में महावीर तीर्थंकर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाई जाती है।

सिख:  दिवाली को सिख समुदाय में "बंदी छोड़ दिवस" के रूप में मनाया जाता है, जब गुरु हरगोबिंद सिंह ने अपने ग़ुलामों को बंदीगृह से छुड़ाया था।

आतिशबाज़ी:

 दिवाली के अवसर पर आतिशबाज़ी भी की जाती है, जिसमें विशेषतः बाजारों में और जगह-जगह आतिशबाज़ी का प्रदर्शन किया जाता है। यह रंग-बिरंगे आतिशबाज़ी दिखावा देखने वालों के मन को मोह लेती है।


दीपावली की प्रार्थनाएं:

 दिवालीपर लोग भगवान लक्ष्मी, गणेश, और सरस्वती की पूजा करते हैं। वे धन, बुद्धि, और ज्ञान की प्रार्थना करते हैं और दियों के समर्पण करते हैं।


लाभ एवं नुकसान:

 दिवाली के उत्सव का लाभ यह है कि यह मानसिक और आर्थिक संतुलन को बढ़ावा देता है। लोग घरों की सजावट करते हैं, परिवार और दोस्तों के साथ खुशियां मनाते हैं, और गिफ्ट्स और मिठाई बांटते हैं। हालांकि, आतिशबाज़ी के समय और पटाखे चलाने के दौरान सवारी और पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए, ध्यान रखना आवश्यक है और पटाखे का मात्रा में संयम रखना चाहिए।


दिवाली पर निबंध (Essay on Diwali in Hindi) 

प्रस्तावना (Introduction):

दिवाली, जिसे  दिवाली या लक्ष्मी पूजा के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रमुख हिंदू त्योहार है। यह प्रतिवर्ष भारत और अन्य भारतीय देशों में मनाया जाता है। इस त्योहार में लोग अपने घरों को सजाते हैं, दीपों की पंक्ति जलाते हैं, आतिशबाज़ी करते हैं, और एक दूसरे को गिफ्ट्स और मिठाई भेजते हैं। दिवाली का महत्वपूर्ण संदेश है ज्योति की विजय और अंधकार की पराजय।


दीपावली पूजा शुभ मुहूर्त (Deepawli puja shubh muhurt):

 दिवाली पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 2023 में 4 नवंबर, शुक्रवार है। प्रातःकाल 06:15 से 08:23 तक यह मुहूर्त है।


निबंध (Essay):

 दिवाली: प्रकाश का त्योहार 

भारतीय उपमहाद्वीप में दिवाली एक ऐसा प्रमुख और आनंदमय त्योहार है, जिसे हम प्रकाश के त्योहार के रूप में भी जानते हैं। यह त्योहार अक्टूबर और नवंबर के बीच मनाया जाता है और हर साल लाखों लोग इसे धूमधाम से मनाते हैं। दिवाली के दिन घरों की खिड़कियों में जलते दीपों की रौशनी और आतिशबाज़ी की धूम से यह त्योहार रंगों का उत्सव बन जाता है। इस अवसर पर परिवारों और मित्रों के बीच मिठाई और उपहारों का आनंद भी लिया जाता है।

 दिवाली का महत्त्व बहुत गहरा है और इसे भारतीय सभ्यता में विशेष महत्त्व दिया जाता है। इसे आध्यात्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जाता है। दिवाली के दौरान भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है और लोग उनसे धन, समृद्धि, सौभाग्य और शुभता की प्रार्थना करते हैं।

 दिवाली का आध्यात्मिक महत्त्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन घरों की सजावट और दीपों की रौशनी आत्मिक उज्ज्वलता की प्रतीक होती है। यह त्योहार हमें यह याद दिलाता है कि प्रकाश हमारे जीवन में अंधकार को दूर करता है और हमें सत्य, ज्ञान, और आनंद की ओर ले जाता है। दीपावली के दिन घरों के बाहर और अंदर दीपों की रौशनी हमें आनंदित और प्रकाशित बनाती है। यह त्योहार हमें धार्मिकता, आध्यात्मिकता, और सच्ची खुशियों के साथ जीने का संकेत देता है।

 दिवाली का सामाजिक महत्त्व भी बहुत बड़ा है। यह एक ऐसा त्योहार है जिसमें परिवार के सदस्यों को एकजुट होने का अवसर मिलता है। इस दिन परिवार के सभी लोग मिलकर घर को सजाते हैं, दीपों की रौशनी से घर को प्रकाशित करते हैं और खुशहाली के साथ मिठाई खाते हैं। इस त्योहार के माध्यम से परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम, विश्राम, और सम्बन्धों को मजबूती मिलती है।

 दिवाली का संस्कृतिक महत्त्व भी अपार है। यह त्योहार भारतीय संस्कृति और परंपराओं का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। इस दिन कई रंगीन और कला संग्रहालयों का आयोजन किया जाता है, जहां परंपरागत कला, हस्तशिल्प, और शिल्प को प्रदर्शित किया जाता है। दिवाली पर भारतीय संस्कृति और विरासत की प्रशंसा की जाती है, और यह एक ऐसा अवसर है जहां मानवता की एकता, भाईचारा, और विविधता का संकेत दिया जाता है।

 दिवाली का आर्थिक महत्त्व भी अद्वितीय है। यह त्योहार व्यापारिक और आर्थिक महत्त्वपूर्णता रखता है। इसे खरीदारी, व्यापार, और नई शुरुआतों का समय माना जाता है। लोग इस मौके पर नई सामग्री, वस्त्र, और सजावटी सामग्री खरीदते हैं और व्यापार की गतिविधियों में वृद्धि होती है।

 दिवाली का संसार के अन्य भागों में भी महत्त्व है। यह त्योहार देशभर में जीवंत है और विभिन्न समुदायों के लोग इसे धूमधाम से मनाते हैं। भारतीय विदेशी यात्रियों द्वारा भी यह त्योहार खुशी और उत्साह के साथ मनाया जाता है। विभिन्न देशों में दिवाली मनाने के तरीकों में भी विविधता होती है, लेकिन प्रकाश, रंग, और ध्वनि का अद्वितीय मेल दिवाली को विश्व भर में पहचाने जाने का कारण बनता है।

 दिवाली पर निबंध के आखिरी शब्दों में, हम कह सकते हैं कि दिवाली हमें प्रकाश की ओर ले जाने और समृद्धि, खुशहाली, और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए प्रेरित करता है। यह एक ऐसा त्योहार है जो हमें प्रेम, शांति, और एकता की ओर ले जाता है। इसे सभी धर्मों के लोगों द्वारा एकसाथ मनाने की परंपरा है, जिससे हमारी विश्वसम्मति और सद्भावना को प्रतिष्ठित किया जाता है। दिवाली हमें प्रकाश के द्वारा आदर्श जीवन की ओर प्रेरित करता है और हमें खुशहाल, समृद्ध और आनंदित बनाता है। इसलिए, दिवाली के त्योहार को सभी लोगों के लिए सर्वोत्तम का दिन माना जाता है।

उपसंहार (Conclusion):

दीपावली हिंदू संस्कृति और परंपराओं का महत्वपूर्ण अंग है। यह प्रकाश, समृद्धि, सौभाग्य, और खुशियों का प्रतीक है। इसे संयमपूर्ण रखकर और पर्यावरण का ध्यान रखकर मनाना चाहिए।

दिवाली, जो भी दीपावली या लक्ष्मी पूजा के नाम से जाना जाता है, हिंदू समुदाय में महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। इसे भारत और अन्य हिंदी बोलने वाले देशों में विशेष धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है।


दिवाली के महत्व को कई पहलुओं से देखा जा सकता है:

संस्कृतिक महत्व: दिवाली हिंदू संस्कृति, परंपराओं और धर्म के महत्वपूर्ण हिस्से का प्रतीक है। यह त्योहार भारतीय समुदाय में शुभता, प्रेम, और विश्वास को प्रमोट करता है।

धार्मिक महत्व: दिवाली पर हिंदू लोग भगवान लक्ष्मी, गणेश और सरस्वती की पूजा करते हैं। इसे धन, समृद्धि, ज्ञान, बुद्धि, और सुख के आदान-प्रदान का अवसर माना जाता है।

ऐतिहासिक महत्व: दिवाली के पीछे ऐतिहासिक कथाएं हैं जैसे कि भगवान राम के अयोध्या लौटने की कथा और माता लक्ष्मी के अवतारन की कथा। इन कथाओं के माध्यम से दिवाली का महत्वपूर्ण इतिहासिक और पौराणिक संदेश भी दिया जाता है।

आर्थिक महत्व: दिवाली व्यापारिक और आर्थिक महत्वपूर्णता रखता है। यह समय होता है जब लोग अपने घरों को सजाते हैं, खरीदारी करते हैं, और आपसी तौर पर उपहार और मिठाई वितरित करते हैं। यह व्यापार और अर्थिक समृद्धि की वृद्धि को प्रमोट करता है।

आत्मिक महत्व: दिवाली आत्मिक उन्नति, समानता, और आनंद की प्रकाशित करता है। इस त्योहार में घरों को दीपों से ज्योतिष्मय बनाया जाता है, जो अंधकार को दूर करके ज्ञान, उज्ज्वलता, और सच्चाई की प्रतीक है।

इस प्रकार, दिवाली का महत्व अपार है और यह लोगों को धार्मिक, सांस्कृतिक, और आर्थिक रूप से संपन्न और समृद्ध बनाने का अवसर प्रदान करता है।


दिवली सबसे पहले किसने मनाई थी:

दिवाली के मनाने का प्रारंभ भारतीय सभ्यता में बहुत पहले ही हुआ था। हालांकि, इसका स्पष्ट उल्लेख पुराणों, इतिहास और मिथकों में नहीं है। दिवाली का मनाने का प्रथम उल्लेख महाभारत में किया गया है। महाभारत के युद्ध के बाद, पांडवों ने अपने अज्ञातवास के अंत में अपने गृहवास को लौटते समय दिवाली के दीप जलाए थे। यह प्रथा उन्हें स्वागत करते हुए और अंधकार से प्रकाश की विजय को याद दिलाने के लिए शुरू की गई थी।

इसके अलावा, भगवान राम के अयोध्या लौटने की कथा में भी उल्लेख है कि अयोध्या नगर के निवासी ने राम के स्वागत में दीपावली के दीप जलाए थे। यह भी दिवाली के मनाने का प्रारंभिक उदाहरण माना जाता है।

इस तरह से,  दिवाली का मनाने का प्रारंभ बहुत पहले ही हुआ था और यह प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला त्योहार है।

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