चंद्रशेखर आजाद के 20 अनसुनी बाते :chandrshekhar aazad biography 2023

चंद्रशेखर आजाद के 20 अनसुनी बाते:chandrashekhar aazad biography 2023

20 ज्ञात बातें:

    • आजाद का असली नाम चन्द्रशेखर श्रीवास्तव था।
    • उन्हें नेताजी भी कहा जाता था।
    • उनके पिता का नाम स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय पंडित शैतान सिंह था।
    • उनके बड़े भाई भगवत सिंह भी स्वतंत्रता सेनानी थे।
    • उन्होंने राजगुरु और भगत सिंह के साथ मिलकर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन की स्थापना की थी।
    • उन्होंने 1928 में लाहौर में आयोजित कांग्रेस के अधिवेशन में भाषण दिया था।
    • उन्हें गणधर्व हीरलाल के भाषणों से प्रभावित होकर राष्ट्रीय भावना विकसित हुई थी।
    • उन्होंने हिंदी में संगीत के कार्यक्रम भी आयोजित किए थे।
    • उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विरुद्ध आन्दोलन की ओर प्रवृत्त किया था।
    • उन्होंने कानपुर के कानपुर सेंट्रल प्रेस गेट और फेंकूफत्तक धमाकों के माध्यम से ब्रिटिश सरकार को चुनौती दी थी।
    • उन्होंने 1925 में प्रयाग में हुए अखिल भारतीय स्टूडेंट्स कांग्रेस के अधिवेशन में भाग लिया था।
    • उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन के लिए लाहौर के भारतीय संगठन का संचालन भी किया था।
    • उन्होंने अनेक नामों और विशेष रूप से अजाद के नाम से जाने जाने वाले पुस्तकों को लिखा था।
    • उन्होंने जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के विरोध में आंदोलन किया था।
    • उन्होंने एक नाटक 'आजाद' भी लिखा था, जिसे बेनारस के भारतीय नाट्य शास्त्रीय संस्थान में प्रदर्शित किया गया था।
    • उनके नेतृत्व में भारतीय स्वतंत्रता सेना ने कई आतंकी हमले किए थे, जिसमें संगठन ने भारतीय वायुसेना के सर्वाधिक तालियां खाई थीं।
    • उन्होंने साकेत और देहरादून में विद्रोही गठजोड़ बनाई थी।
    • उन्होंने 27 फरवरी 1931 को कंट रेलवे स्टेशन पर भगवत सिंह के साथ मिलकर स्वर्गीय अजगर सिंह की हत्या की थी।
    • उनके ग्रामीण आंदोलन के चलते आलिराजपुर जिले के भवनी गांव को गवर्नमेंट एकाडमी के रूप में बदल दिया गया।

10 अज्ञात बातें:

  • चंद्रशेखर आजाद को अखिल भारतीय संगठन के अध्यक्ष बनाया गया था।
  • उन्होंने देशवासियों से धर्मनिरपेक्षता बढ़ावा दिया था।
  • उन्होंने दिल्ली के भारतीय विश्वविद्यालय में पढ़ाई की थी।
  • उन्होंने राष्ट्रीय कांग्रेस में समाजवादी संगठन की स्थापना की थी।
  • उन्हें अपने शेरवुड संघ से प्रभावित होकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने का फैसला किया था।
  • उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारतीय राष्ट्रीय फौजी संगठन भी स्थापित किया था।
  • उन्होंने ब्रिटिश व्यापारियों के खिलाफ अभियान चलाया था।
  • उन्होंने 1926 में एक नृत्य-गीत का भी निर्माण किया था।
  • उन्होंने आजाद दोहे और कविताएँ भी लिखी थीं।
  • उन्होंने स्वयंसेवी आंदोलनों की रचना की थी जो देशवासियों के आधार पर संगठित होते थे।

 



जन्म: चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को उत्तर प्रदेश के आलिराजपुर जिले (वर्तमान मिर्जापुर जिले) के गांव भवनी जिले में हुआ था।


विवाह: चंद्रशेखर आजाद का विवाह नहीं हुआ था, और वे ब्रह्मचारी थे।


चंद्रशेखर आजाद का जीवन परिचयचंद्रशेखर आजाद (जिनका असली नाम चंद्रशेखर श्रीवास्तव था) की मृत्यु उन्हें दिल्ली के आलिपुर जेल में 27 फरवरी 1931 को हुई थी। वे ब्रिटिश सरकार के साथ एक द्वंद्व के दौरान जेल में आए थे। उन्होंने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। इससे पहले उन्होंने वचन दिया था कि वह जिंदा नहीं पकड़े जाएंगे।

चंद्रशेखर आजाद का जन्म उत्तर प्रदेश के आलिराजपुर जिले (वर्तमान मिर्जापुर जिले) के गांव भवनी जिले में हुआ था।

चंद्रशेखर आजाद की मृत्यु फीरोज़ शाह कोलोनी नामक पार्क, इलाहाबाद (वर्तमान प्रयागराज) में हुई थी।

चंद्रशेखर आजाद ने गोली मारने का निर्णय लिया था ताकि वे ब्रिटिश सरकार के हाथों जिंदा न पकड़े जाएं और अपनी स्वतंत्रता के आदर्शों के लिए बलिदान दे सकें।

चंद्रशेखर आजाद की प्रतिज्ञा थी, "मैं आजाद हूँ, दोस्तों, मैंने आपने ख़िलाफ़ कुछ नहीं कहा। जब भारत अंग्रेज़ी सरकार से आज़ाद होगा तो दूसरा नाम आजाद रख दूंगा।"

चंद्रशेखर आजाद अपने आतंकी गतिविधियों के लिए जाने जाते थे, और उन्हें "आजाद" के नाम से भी जाना जाता था। 


चंद्रशेखर ने जिंदा न पकड़े जाने की अपनी प्रतिज्ञा कैसे रखी?

चंद्रशेखर आजाद ने जिंदा न पकड़े जाने की अपनी प्रतिज्ञा अपने देशवासियों के साथ एक रूपांतरण के दौरान रखी थी। वे ब्रिटिश सरकार के एक द्वंद्व के दौरान जेल में आए थे और उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही थी। इससे पहले कि उन्हें पकड़ लिया जाए, उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा दी कि वह जिंदा नहीं पकड़े जाएंगे। यह उनके विश्वास का प्रतीक था और उन्होंने स्वतंत्रता के लिए अपने जीवन की क़ुर्बानी को दिखाने का संकल्प किया था।

जिंदा न पकड़े जाने की उनकी प्रतिज्ञा उनके स्वतंत्रता संग्राम में विशेष महत्वपूर्ण रही, क्योंकि इससे उन्हें दिल्ली के आलिपुर जेल में गिरफ्तार किया गया और आखिरकार उन्होंने वहां आत्महत्या भी कर ली। उनके बलिदान ने देशवासियों के दिलों में स्वतंत्रता के आदर्शों को जीवंत रखा, और उन्हें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पक्षधर के रूप में याद किया जाता है।


कार्य: चंद्रशेखर आजाद ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में गुमनामता के चलते जाने जाते थे और उन्होंने कई आतंकी हमले भी किए थे, जिसमें जवाहरलाल नेहरू द्वारा कथित तौर पर जब 1929 में लाहौर के सांगारमल कॉलेज के उद्घाटन के दौरान हुए एक बम धमाके के विरोध में विश्वास की संगठना की गई थी।



चंद्रशेखर आजाद ने खुद को गोली क्यों मारी?

चंद्रशेखर आजाद ने खुद को गोली मारने का कारण था उनकी गिरफ्तारी से बचने का निर्णय। उन्होंने 27 फरवरी 1931 को दिल्ली के आलिपुर जेल में खुद को गोली मार दिया था।

उन्हें पहले खुलासा हुआ था कि वे सिंहसदन रेलवे स्टेशन पर भगत सिंह के साथ मिलकर स्वर्गीय अजगर सिंह की हत्या करने में शामिल हुए थे। इसके बाद उन्हें दिल्ली के आलिपुर जेल में गिरफ्तार किया गया। जेल में उन्हें ब्रिटिश सरकार के साथ एक द्वंद्व में फंसा दिया गया था। वह जानते थे कि अगर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा, तो उन्हें बेहद कठिनाईयों का सामना करना पड़ेगा और शायद उन्हें मौत की सजा भी हो सकती है।

चंद्रशेखर आजाद ने खुद को गोली मारकर उस समय के दिल्ली के आलिपुर जेल की आतंक की नज़र से बचने का फैसला किया। उन्होंने यह भी दिखाना चाहा कि वे ब्रिटिश सरकार के अधीन रहने को तैयार नहीं थे, और उनके विश्वास के अनुसार उन्हें जिंदा नहीं पकड़ा जा सकता था। उनका स्वतंत्रता संग्राम में दिखाया गया बलिदान उनके देशवासियों के दिलों में स्वतंत्रता के आदर्शों को जीवंत रखा, और उन्हें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पक्षधर के रूप में याद किया जाता है।


नारा: चंद्रशेखर आजाद का एक प्रसिद्ध नारा था - "दंगा फसादी, आजादी"। 


संघर्ष: चंद्रशेखर आजाद ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष किया और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपना समर्थन दिया। उन्होंने गुमनामता के चलते "आजाद" के नाम से जाने जाने वाले प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी थे।


मृत्यु: चंद्रशेखर आजाद की मृत्यु 27 फरवरी 1931 को कंट रेलवे स्टेशन, इलाहाबाद में हुई थी। उनकी मृत्यु उनके स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हुई थी।


विश्वास: चंद्रशेखर आजाद भारतीय स्वतंत्रता के पक्षधर और अपने देश के स्वाधीनता के लिए लड़ने में पूरी तरह विश्वास रखते थे। उन्होंने अपने आंदोलन में सच्चे और निष्ठावान भारतीय होने पर पूरी तरह गर्व किया था।

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