Aruna Asaf Ali ki kahani 2023

 Aruna Asaf Ali ki kahani 



Aruna Asaf Ali (अरुणा असफ़ाली) एक महान स्वतंत्रता सेनानी और समाजसेवी थीं। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई और देश के स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उन्हें 1997 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। यहां उनके जीवन की एक विस्तृत जीवनी दी गई है:

जन्म और शिक्षा:

Aruna Asaf Ali का जन्म 16 जुलाई 1909 को हरियाणा के कालका गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम उपेन्द्रनाथ गांगुली था। उनके पिता एक व्यापारी थे। अरुणा को लाहौर के सेक्रेड हार्ट कन्वेंट स्कूल में शिक्षा मिली। उन्होंने अपनी पढ़ाई को नैनीताल के ऑल सेंट्स कॉलेज में जारी रखा। उनकी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में अपनी भूमिका निभाना शुरू कर दिया।

स्वतंत्रता संग्राम:

Aruna Asaf Ali की स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी 1930 में उनके गांधी-इरविन समझौते के बाद शुरू हुई। उन्होंने गांधी जी के नेतृत्व में चल रहे नमक सत्याग्रह में भाग लिया और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने अपने युवा वर्ग को आग्रह किया कि वे विद्रोह के बारे में विचारधारा की बातें छोड़कर कार्रवाई में शामिल हों। उन्होंने कहा था, "हिंसा और अहिंसा के बारे में बेकार चर्चा और अहिंसा के बारे में बेकार चर्चा करने की जगह अपने देश के लिए कुछ करें।" उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य के रूप में भी अपना योगदान दिया और गांधी जी के साथ निरंतर काम किया।

Aruna Asaf Ali की अहम भूमिका 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन में रही। इस आन्दोलन के दौरान उन्होंने अपने नेतृत्व में दिल्ली के अंबेडकर भवन में एक राष्ट्रीय आधिवेशन का आयोजन किया। इस आधिवेशन में उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेताओं को एकजुट करने का लक्ष्य रखा था। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के राष्ट्रीय बंगले में एक राष्ट्रीय झंडा लहराया, जिसे ब्रिटिश सरकार ने उठाने की कोशिश की थी। इसके बाद उन्होंने अपने नेतृत्व में दिल्ली के अंबेडकर भवन में एक राष्ट्रीय आधिवेशन का आयोजन किया। इस आधिवेशन में उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेताओं को एकजुट करने का लक्ष्य रखा था। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के राष्ट्रीय बंगले में एक राष्ट्रीय झंडा लहराया, जिसे ब्रिटिश सरकार ने उठाने की कोशिश की थी।


स्वतंत्रता के बाद:

भारत की स्वतंत्रता के बाद, Aruna Asaf Ali ने राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में अपना योगदान जारी रखा। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के गवर्निंग बॉडी के सदस्य के रूप में कार्य किया और दिल्ली में महिला और बाल विकास के क्षेत्र में अपनी सेवाएं प्रदान की। उन्होंने भी एक अखबार के संपादक के रूप में काम किया और अपने लेखों के माध्यम से समाज को जागरूक किया।


Aruna Asaf Ali की मृत्यु:

Aruna Asaf Ali का निधन 29 जुलाई 1996 को हुआ। उनकी मृत्यु के बाद उन्हें भारत सरकार द्वारा भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उनकी याद में दिल्ली में Aruna Asaf Ali मार्ग की स्थापना की गई है, जो उनके नाम पर रखा गया है।

इस तरह से, Aruna Asaf Ali ने अपने जीवन में एक महान योगदान दिया और उनकी साहसिकता, स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी और समाजसेवा के क्षेत्र में उनकी प्रशंसा देशभक्तों द्वारा की जाती है। उनकी जीवनी एक प्रेरणादायक उदाहरण है जो हमें स्वतंत्रता, सामरिकता और समाजसेवा के महत्व को समझाती है।


F/Q

 Aruna Asaf Ali कौन से आंदोलन से संबंधित है?

 Aruna Asaf Ali भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित हैं। वे भारतीय आज़ादी के लिए संघर्ष करने वाली महिला स्वतंत्रता सेनानी थीं।


 Aruna Asaf Ali को भारत रत्न से कब सम्मानित किया गया?

 Aruna Asaf Ali को भारत रत्न से सम्मानित किया गया था 1997 में। उन्हें भारतीय आज़ादी के लिए उनके संघर्ष और योगदान को मान्यता देते हुए यह सम्मान दिया गया था।

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